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07 Feb, 2026

अमृत 2 में मध्य प्रदेश की रफ्तार धीमी

पानी लगातार गंदा होता जा रहा है टेंडर में "रिजुविनेशन आफ वॉटर बॉडी " लिखा जाता है परंतु कार्य में सिविल वर्क और सौंदर्य करण का कार्य अधिकांश होता है।

अटल मिशन फॉर रिजूवनेशन एंड अर्बन ट्रांसपोर्टेशन जिसे अमृत 2 भी कहते हैं ,1 अक्टूबर 2021 को शुभारंभ की गई थी और इसे 2026 तक समाप्त किया जाना था । इसमें लगभग 500 अमृत शहरों में सीवर की व्यवस्था का प्रबंध , पेयजल की व्यवस्था, तालाबों के जल को पुनर्जीवन देना मुख्य कार्य के रूप में शामिल थे । इसकी रफ्तार अब बहुत धीमी हो चुकी है । मध्य प्रदेश में ही लगभग 50% पर ही काम हो सका है। सीवर को जिस तरीके से निपटने का तरीका पुरानी एसटीपी के माध्यम से किया जा रहा था वह पूरे देश भर में लगभग फेल की स्थिति में है। जिसके कारण नदियों में प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है ,परंतु सरकारों द्वारा नई तकनीक के प्रयोग के लिए कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है । मध्य प्रदेश में 78 शहरों में अमृत 2 के लिए 13000 करोड़ का बजट दिया गया है । रीवा ,जबलपुर और शहडोल में हालात काफी खराब है । जबलपुर में नर्मदा नदी में सीधे सीवर जाने से उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लिया है और उसे पर जानकारी मांगी है । नगरीय निकाय को फटकार लगाई है ,वहां के एस टी पी फेल हो चुके हैं, जिसके कारण सीवर सीधा नर्मदा नदी में जा रहा है ।

कई नगरीय निकायों में पानी के पुनर्जीवन की जगह सौंदर्य करण कराया गया है । पानी लगातार गंदा होता जा रहा है टेंडर में "रिजुविनेशन आफ वॉटर बॉडी " लिखा जाता है परंतु कार्य में सिविल वर्क और सौंदर्य करण का कार्य अधिकांश होता है। इसलिए पानी की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है । अब उच्च न्यायालय और एनजीटी नगरीय निकाय और उद्योगों पर पेनल्टी लगा रही हैं । परंतु जल की शुद्धता पर कहीं पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।